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भूरि भूरि है प्रणाम गुरु गिरिधारी को

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प्रथम प्रणाम गण नायक गणेश प्रभु द्वितीय प्रणाम वीणापाणि सुखकारी को तृतीय प्रणाम मेरे इष्ट प्रभु रघुनाथ भूरि भूरि है प्रणाम गुरु गिरिधारी को पंचम प्रणाम भक्त हनुमान को है मेरा  षष्ठम प्रणाम सत्य वीर
कवि अटल नारायण का काव्य-संसार

मेरे शब्द, मेरी संवेदना

भावों, संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और जीवन की अनुभूतियों से सजे मेरे छंदों की दुनिया में आपका स्वागत है।

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